बुधवार, 11 मार्च 2009

होली की बधाई

होली रंगों का त्योहार है, पर सिनसिनाटी में ज्यादा कुछ कर नही सके। प्रवासी होने का कुछ तो फर्क होता ही है । मैं आज रंग तो खेल नहीं पाया, सोंचा ब्लॉग पर सबको बधाई दे दूँ। होली तो मुंगेर की ही अच्छी थी। खाना, पीना, सबके घर जाना, बडो के पांव पर अबीर देना और छोटों के सर पर अबीर का टीका लगाना।



गुरुवार, 5 मार्च 2009

'नियाग्रा फाल'


क्या आपका भगवान पर विश्वास है ? अगर नहीं है, तो इक बार आप 'नियाग्रा फाल' अवश्य जाइये। वहां पहुंचकर शायद पहली बार आपको भगवान की सबलता का अहसास होगा। इतनी ऊँचाई से गिरते जल के सैलाब को देखकर, आप भयभीत भी हो सकते हैं। पर डरिये नहीं, स्वीकार कीजिये उपरवाले के शक्ति और सामर्थ्य को और खो जाइए इस जल-प्रपात में।
'नियाग्रा फाल' हमारे घर से लगभग ८ घंटे के ड्राइव पर है। अगर सुबह के ६ बजे आप सिनसिनाटी से निकले, तो दोपहर २-३ बजे तक आप नियाग्रा पहुँच सकते हैं। नियाग्रा जाने के रास्ते में आपको कोलंबस और एइरी जैसे कई शहर मिलेंगे। बुफैलो सिटी क्रॉस करते ही नियाग्रा आ जाता हैं। बुफैलो पहुँचते ही हम सब काफी उत्साहित हो गये थे। हमारा होटल फाल से ज्यादा दूर नहीं था। होटल पहुंचकर थोड़ा फ्रेश हुए और चल दिए उस हुंकार की ओर , जो सारे वातावरण को अपने अट्टहास से सराबोर किए हुए था। वहां पहुंचकर पता चला 'मेड ऑफ़ द मिस्ट' और 'केव ऑफ़ द विंड' नियाग्रा के दो मुख्य आकर्षण हैं। ये दोने टूर एक दोने से काफी भिन्न है, शायद इसलिए आपको ये दोने टूर करना चाहिए।। 'मेड ऑफ़ द मिस्ट' टूर में आप एक बोट से फाल के करीब जाते हैं। इस दौरान आप नियाग्रा को बड़े अच्छे से महसूस कर सकते हैं। जैसे ही फाल के करीब पहुंचेगे, निश्चय ही आप 'मिस्ट' से भींग चुके होंगे। आपकी आंखे शायद कूदते-फानते जल की छोटी-छोटी बूंदों से नहाकर बंद होना चाहेंगी , फिर भी आप अपनी आंखे खोले रखेंगे और चाहेंगे ऊपरवाले के इस शक्ति पर्दर्शन का पुरी तरह से दीदार करना। जब आप वहां से लौटेंगे तो सिर्फ़ आपकी आंखों में खुशी और ह्रदय में संतुष्टि होगी। अभी आपको वापस नही जाना है, अभी तो आपको 'केव ऑफ़ द विंड' भी जाना है। 'केव ऑफ़ द विंड' टूर में आप नियाग्रा फाल के ठीक नीचे पहुँचते हैं। अमेरिकन सरकार ने जिस बारीकी से 'केव' ( गुफा) का निर्माण करवाया है वो काबिले तारीफ है। गुफा में काफी ठण्ड होती है। गुफा से गुजरकर ही आप नियाग्रा के पास पहुँचते हैं। आप चाहे तो अपने हांथो से गिरते जल को छू भी सकते हैं और अगर आप चाहे तो पुरी तरह नहा भी सकते हैं।। अगर आपको लगता है की आप बहुत ताकतवर हैं तो गिरते जल के थोड़ा और करीब जाईये। काफी तीव्र गाती से गिरते जल का विरोध आप ज्यादा देर तक नहीं कर सकते। नियाग्रा के सबसे नजदीक पहुँचते पहुंचते आप थक चुके होते हैं फिर भी आप लौटने का नाम नही लेते। जब आप वहां से वापस लौटते हैं तो बस यही ख्याल रहता है, काश थोड़ा और रुक सके। नियाग्रा ऐसी जगह है जहाँ आप दुबारा अवश्य जाना चाहेंगे।